Ghar Laut Aaunga Garhwali Poem"घर लौट आऊंगा गढ़वाली कविता

Ghar laut aaunga garhwali kavita 

Ghar Laut Aaunga Garhwali Poem
​Garhwali Kavita on Pahadi Life
​Pahadi Pravasi Poem in Garhwali
​घर लौट आऊंगा गढ़वाली कविता

Ghar Laut Aaunga Garhwali Poem"



 gharwali भाषा में पढने के लिए निचे की तरफ  स्क्रॉल करें
 
एक उम्र बाद में हमेशा के लिए घर लौट आऊंगा 
 एक उम्र तक इतना तो काम ही लूंगा
 की वापस पहाड़ आकर शांति से फिर से जी सकूंगा
 कुछ गाय बकरी और एक भोटीया कुत्ता पालूंगा 
 सुबह जल्दी उठकर पहाड़ों में पडती धूप को देखूंगा 
 नदी का गदेरों में मछलियों को आजाद देखूंगा
 बताऊंगा होने की मैं भी उन्हीं की तरह आजाद जी रहा हूं
 पहाड़ों से गिरे तालाब में खुद को आजाद देखूंगा
 दिन में झोल भात पकाऊंगा, 
बेफिक्र होकर फिर शाम तक सोऊंगा
 शाम को फिर से बच्चों के साथ खेलने निकलूंगा 
 रातों को गाय को छानी में बांधकर 
 खा पीकर खिड़की से तारों को देखते हुए सो जाऊँगा 
 एक उम्र तक इतना तो कमा ही लूंगा  
 की वापस पहाड़ जाकर सुकून से जी सकूंगा

गढ़वाली भाषा में 
यौख बख्त में सदानी लै गौ घर बौड़ी की ऐ जौलु 
यौ टैम तक इतगा त कमैं ही ल्यूंलू 
कि बौड़ी की पहाड़ ऐकि चैन से फिर रै सकलु 
कुछ गौंडी -बखरा अर यौ भोटिया कुकूर पालूलूं
फजल जल्दी उठीकि डांडों पर पड़दु घाम तैं देखूलूं
गाड़-गदेरों मां मछलियों तैं आजाद देखूलूं
बताऊलूं उनों तैं कि मैं भी उनिएं जनु आजाद ज्यूँणू छौं
 डांड्यूं बिच बणि ताल मां अफ्फु तैं आजाद हेरलु 
 दुपर मा झोल-भात पकाऊलूं, बेफिक्र ह्वेकी फिर ब्यखुदी बक्त तक सूयूं रौऊँलूं
 ब्यखुनी कौं फिर नौन्यालों दगड़ खेलण निकलूलूं
 रातों तैं गोरुओं तैं छानी मां बांधी कि,
 खाई-पीई कि खिड़की बटी गैणो तैं हेरि - हेरि सूई जाऊंलूं
यौख बख्त में सदानी लै गौ घर बौड़ी की ऐ जौलु 
यौ टैम तक इतगा त कमैं ही ल्यूंलू 


Yokh bakht mein sadani lai gau ghar baudi ki ai jaulu
Yau taim tak itga ta kamai hi lyumlu
Ki baudi ki pahad aiki chain se phir rai saklu
Kuch gaundi-bakhra ar yau bhotiya kukur palulu
Fazal jaldi uthiki dandon par paddu gham tain dekhulu
Gad-gaderon ma machhliyon tain aajad dekhulu
Bataulu unon tain ki main bhi unien janu aajad jyunnu chhaun
Dandyun bich bani taal ma affu tain aajad heralu
Dupar ma jhol-bhat pakaulu, befikr hweki phir byakhudi bakt tak suyun rauulu
Byakhuni kaun phir nounyalon dagad khelan nikalulu
Raton tain goruon tain chhani ma bandhi ki,
Khai-pii ki khidki bati gaino tain heri-heri sui jaulu
Yokh bakht mein sadani lai gau ghar baudi ki ai jaulu
Yau taim tak itga ta kamai hi lyumlu


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